भोपाल, 25 जुलाई । मध्यप्रदेश विधानसभा में कल एक विधेयक पर मत विभाजन के माध्यम से सरकार के शक्ति परीक्षण के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक अपने दो विधायकों के कांग्रेस के पाले में जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राकेश सिंह कल देर रात ही भोपाल लौट आए। श्री सिंह आज यहां पार्टी के आला नेताओं के साथ बैठकके बाद आगे की रणनीति तय कर रहे हैं ।
समझा जा रहा है कि श्री सिंह पार्टी के दो विधायकों के पाला बदलने के बाद बदली हुई परिस्थितियों के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव समेत अन्य वरिष्ठ विधायकों के साथ चर्चा कर मामले की गंभीरता पर विचारणीय है । पाला बदलने वाले दोनों विधायकों पर आगे की कार्रवाई के बारे में भी बैठक में चर्चा संभावित रही ।
इसके पहले कल मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव द्वारा मुख्यमंत्री कमलनाथ को चुनौती देने के लगभग चार घंटे बाद ही एक संशोधन विधेयक पर मतदान के जरिए कांग्रेस ने एक ओर जहां बहुमत साबित कर दिया, वहीं भाजपा के दो विधायकों को अपने पाले में लाकर विपक्ष को फिलहाल बैकफुट पर ला दिया।
पाला बदलने वाले दोनों विधायकों नारायण त्रिपाठी और शरद कोल ने कहा कि वे विकास के एजेंडे को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ हैं। दोनों ने दावा किया कि ये एक तरह से उनकी घर वापसी है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने आज दावा किया कि पार्टी में सब कुछ अनुकूल और नियंत्रण में है।
कल देर रात यहां पहुंचे सांसद श्री सिंह ने आज संवाददाताओं से चर्चा के दौरान दावा किया कि पार्टी में सब कुछ अनुकूल और नियंत्रण में है।
उन्होंने पार्टी में गुटबाजी की खबरों को भी नकारते हुए कहा कि पूरी पार्टी एक है।
मध्यप्रदेश विधानसभा में कल एक विधेयक पर मत विभाजन के माध्यम से सरकार के शक्ति परीक्षण के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी को अभी खुश होने की जरूरत नहीं है: गोपाल भार्गव
मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने एक विधेयक पर मत विभाजन के दौरान भारतीय जनता पार्टी के दो विधायकों के कांग्रेस सरकार के पक्ष में खड़े होने के बाद आज दावा किया कि कांग्रेस को अभी खुश होने की जरुरत नहीं है।
श्री भार्गव ने आज यहां संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा कि कल विधानसभा में हुआ घटनाक्रम विश्वासमत नहीं था। विधायकों की संख्या की प्रामाणिकता तभी होती, जब सरकार विश्वासमत के लिए मतदान कराती। उसके बाद भाजपा व्हिप जारी करती। कल जो हुआ, वो बच्चों जैसा नाटक हुआ, जिसका कोई महत्व नहीं है। कांग्रेस पार्टी को अभी खुश होने की जरुरत नहीं है।
भाजपा के दो विधायकों के कांग्रेस के समर्थन में जाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी उनसे बात होनी है। अभी कुछ तय नहीं हुआ है। विधायकों को क्या आश्वासन दिया गया है, इस पर भी चर्चा होगी।
उन्होंने दावा किया कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है और समय आने पर इसे साबित भी कर दिया जाएगा।
एक सवाल के जवाब में श्री भार्गव ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की आलाकमान से चर्चा हुई है।
नेता प्रतिपक्ष ने ये भी कहा कि कल के घटनाक्रम में कांग्रेस अकेली दौड़ी और अव्वल आई। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब विपक्ष ने विधेयक पर समर्थन की बात की और सरकार के मंत्रियों ने ही उस पर मत विभाजन पर जोर दिया।
एक सवाल के जवाब में श्री भार्गव ने कहा कि भाजपा विश्वास की राजनीति करती है और अपने विधायकों की जासूसी नहीं करती।
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