उज्जैन 16 सितम्बर । आरक्षण हो पर उस व्यक्ति उस वर्ग के लिए जिसे वाकई में इसकी जरूरत है। अब आरक्षण का अधिकतर लाभ वो लोग और वर्ग ले रहें हैं जो पूर्ण रूप से हर स्तर पर सक्षम है। इसी कुरीति को खत्म करने और आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू हो और एस्ट्रोसिटी एक्ट खत्म हो, इस मांग को लेकर उज्जैन में करणी सेना और सहयोगी सपाक्स द्वारा आरक्षण के नाम पर कुरीतियों और नीतियों के खिलाफ लाखों की संख्या में विशाल जनसमूह के माध्यम से रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया गया।इस विशाल विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाए भी शामिल हुई। मामले की नज़ाकत को और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारी पुलिसबल तैनात किया गया है।करणी सेना ने विरोध स्वरूप काले कपड़े और हाथों पर काली पट्टी बांधकर शहर के प्रमुख रास्तों से रैली निकाली। जिसमे भारी संख्या में राजपूत करणी सेना, सपाक्स और और ब्राह्मण समाज सहित स्वर्ण समाज के लोग भी शामिल हुए। इस विरोध में भागीदार बनने के लिए आसपास के शहरों एवं ग्रामीण स्थलों से भारी मात्रा स्वर्ण लोग उज्जैन पहुंचे और 3 लाख से जादा लोगो ने प्रदर्शन में हिस्सेदारी की।पैदल काफिला ही करीब 6 किलोमीटर का था।बाइक करीब 6 से 7 हजार ओर करीब 6 हज़ार चार पहिया वाहन थे ।प्रशासन को इतनी तादात का अंदेशा नहीं था। इसमें बुरहानपुर,राजगढ़,मंदसौर सहित करीब 28 जिलो से आये लोग शामिल हुए ।साथ ही राजस्थान से भी बड़ी संख्या में लोग यहाँ आये। इस कारण यहाँ रविवार को सड़कों पर उमड़ता जनसैलाब एक नया इतिहास रच गया।एक माह के दौरान ATROCITY ACT पर जारी बहस, विरोध और प्रदर्शन इस कदर महास्वरूप ले लेगा, सोचा नहीं था।राजपूत करणी सेना के कर्णधारों ने एक लाख “अनारक्षित” वर्ग के लोगों के आने का दावा किया था। पर यहां-वहां जमा दर्शकों में शामिल प्रायः हर व्यक्ति आगे बढ़कर बता रहे थे कि उन्होंने उनके जीवन में इतना बड़ा प्रदर्शन नहीं देखा।तीन लाख का आंकड़ा सबकी जुबां पर था! महिलाओं एवं युवाओं के आक्रोशपूर्ण नारों और उलाहनों ने आकाश गूंजा दिया ।छह किलोमीटर लंबी रैली में मानव सिर गिनना मुश्किल हो गया, वाहनों की कतार के तो कहने ही कुछ अलग थे।माता करणी और महाराणा प्रताप के वंशजों का साथ देने “सपाक्स” यानी समस्त अनारक्षित वर्ग के लोग गगनभेदी नारे लगाते सड़कों पर निकल आए।मध्यप्रदेश के कम से कम 30 फीसदी जिलों व राजस्थान के कई इलाकों से ‘स्वखर्च’ पर महाकाल की नगरी में पहुंचे। तपती दोपहर, भूख-प्यास भी उनके बुलंद हौसले को डिगा ना पाए! केन्द्र सरकार अर्थात भाजपा और मामा यानी (मुख्यमंत्री) शिवराजसिंह चौहान “माई के लालों” (आंदोलनकारियों) के निशाने पर थे। कुरेदने पर उनमें से कइयों ने कहा: “कांग्रेस को तो कतई समर्थन नहीं देंगे औन नोटा की नकारात्मकता में भी नहीं पड़ेंगे।”
attacknews.in
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