नयी दिल्ली, 04 सितम्बर । सरकार ने पाकिस्तान में रह रहे आतंकवादी सरगना हाफिज मोहम्मद सईद, मौलाना मसूद अजहर, जकी उर रहमान लखवी और दाऊद इब्राहिम कास्कर को गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून (यूएपीए) के तहत आतंकवादी घोषित किया है।
गृह मंत्रालय ने आज एक अधिसूचना जारी कर इन चारों को व्यक्तिगत तौर पर आतंकवादी घोषित किया है। यह कानून बनने के बाद किसी आतंकी संगठन से जुड़े लोगों को व्यक्तिगत तौर पर पहली बार आतंकवादियों की सूची में शामिल किया गया है। इन सब पर भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों में शामिल होने तथा उनकी साजिश रचने का आरोप है। विभिन्न जांच एजेन्सियों ने चारों आतंकवादियों के खिलाफ पहले ही रेड कार्नर नोटिस जारी कर चुकी हैं।
सरकार ने गैर कानूनी गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने के लिए हाल ही में संसद में विधेयक पारित कर यह कानून बनाया था।
संसद द्वारा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून 1967 में एक महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दिए जाने के करीब एक महीने बाद ये निर्णय लिए गए हैं जिसके तहत जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर, लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज मुहम्मद सईद, मुंबई आतंकी हमले के आरोपी जकी -उर- रहमान- लखवी और भगोड़े माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम को आतंकवादी घोषित कर दिया।
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि नए कानून के तहत वे सबसे पहले आतंकवादी घोषित किए गए हैं।
मंत्रालय ने कई आतंकी घटनाओं का हवाला दिया जिसमें पाकिस्तान स्थित अजहर शामिल था। इनमें 2001 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा परिसर पर हमला, 2001 में संसद पर हमला, 2016 में पठानकोट एयर बेस पर हमला और 2017 में श्रीनगर में बीएसएफ कैंप पर हमला और 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के एक बस में विस्फोट शामिल हैं।
उसने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 के तहत संयुक्त राष्ट्र ने एक मई, 2019 को अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था और विशेष न्यायाधीश, नयी दिल्ली द्वारा उसे भगोड़ा घोषित किया गया था।
गृह मंत्रालय की एक अधिसूचना में कहा गया है कि केंद्र सरकार का मानना है कि मौलाना मसूद अजहर आतंकवाद में शामिल रहा है और उसे आतंकवादी घोषित किया जाना चाहिए।
गृह मंत्रालय ने सईद के बारे में कहा कि वह विभिन्न हमलों में शामिल था। इनमें 2000 में लाल किला, रामपुर (उत्तर प्रदेश) में सीआरपीएफ शिविर, 2008 में मुंबई हमला शामिल है। मुंबई आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए थे।
जमात-उद-दावा के संस्थापक सईद को भी संयुक्त राष्ट्र ने 10 दिसंबर, 2008 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 के तहत वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था।
लश्कर कमांडर लखवी के बारे में मंत्रालय ने कहा कि वह 2000 में लाल किला, 2008 में रामपुर सीआरपीएफ कैंप, 2008 में मुंबई और जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में बीएसएफ के काफिले सहित कई हमलों में शामिल था।
लश्कर को आतंकवादी गतिविधियां (रोकथाम) कानून 1967 की पहली अनुसूची के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया गया था। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने 10 दिसंबर, 2008 को लखवी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 के तहत वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था।
मंत्रालय ने कहा कि दाऊद एक अंतरराष्ट्रीय अंडरवर्ल्ड अपराध सिंडिकेट चलाता है और वह भारत तथा विदेशों में बेनामी रियल एस्टेट कारोबार चलाने के अलावा धार्मिक कट्टरवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण, हथियारों की तस्करी, जाली मुद्रा का कारोबार, धनशोधन, जबरन वसूली जैसे कृत्यों में भी लिप्त रहा है।
वह आम आदमी को आतंकित करने तथा सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ने के लिए प्रमुख हस्तियों की हत्या के प्रयासों में भी शामिल था।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 के तहत संयुक्त राष्ट्र ने दाऊद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था।
मंत्रालय ने कहा कि दाऊद ने मार्च 1993 में मुंबई में अपने सहयोगियों के साथ सिलसिलेवार बम विस्फोटों को अंजाम दिया जिसके परिणामस्वरूप 257 लोगों की मौत हो गई और बड़े पैमाने पर संपत्तियों को नुकसान हुआ।