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भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में बोडो समझौते ने लिखी शांति और विकास की नई इबारत:नरेन्द्र मोदी ने उग्रवादियों से की मुख्यधारा में आने की अपील attacknews.in

गुवाहाटी, 07 फरवरी ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यहां कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में बोडो समझौता शांति और विकास की नयी इबादत लिखेगा और उन्होंने इसके साथ ही देश के सभी उग्रवादी और नक्सली समूहों से हिंसा का मार्ग छोड़ देश की मुख्यधारा में आने की अपील की।

सरकार और बोडो संगठनों के बीच हुए तीसरे समझौते को लेकर जश्न मनाने उमड़े भारी जनसैलाब को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा, “ मैं बंदूक की शक्ति में विश्वास करने वाले उन सभी लोगों से बोडो युवाओं से सीखने की अपील करता हूं कि वे हिंसा का मार्ग के छोड़कर देश की मुख्यधारा में आयें और जीवन का आनंद उठायें।”

श्री मोदी ने कहा, “ आज असम सहित पूरे पूर्वोत्तर के लिए 21 वीं सदी में एक नयी शुरुआत, एक नयी सुबह, एक नयी प्रेरणा का स्वागत करने का दिन है।”

श्री मोदी ने कहा,“ बोडो समझौते के तहत, बीटीएडी के भीतर आने वाले क्षेत्र की सीमा को ठीक करने के लिए एक आयोग का भी गठन किया जाएगा। इस क्षेत्र को 1,500 करोड़ रुपये का विशेष विकास पैकेज मिलेगा, जिससे कोकराझार, चिरांग, बक्सा और उदलगुरी जैसे जिलों को काफी फायदा पहुंचेगा।”

श्री मोदी की यह असम यात्रा बोडो समझौते के बाद हुई है। यह तीसरा मौका है, जब इस तरह की कोई समझौता हुआ है। इससे पहले दो समझौते 1993 और 2003 में हुए थे। तीसरा समझौता 27 जनवरी को नयी दिल्ली में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के सभी चार गुटों के नेताओं के साथ किया गया था। ये चारों गुट पहले एक अलग बोडोलैंड राज्य की मांग कर रहे थे।

समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद 30 जनवरी को गुवाहाटी में आयोजित एक समारोह के दौरान एनडीएफबी के 1615 सदस्यों ने एके सीरीज़ राइफल, एम 16 राइफल, 4803 राउंड गोला बारूद, 14 ग्रेनेड, एक 2 इंच मोर्टार सहित 178 हथियारों को सुरक्षा बलों को सौंप दिया था।

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लिये कहा कि लोग उन्हें डंडे से मारने की बात करते हैं लेकिन उन्हें माताओं और बहनों का आशीर्वाद प्राप्त है, जो उनकी रक्षा करता है।

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री की यह पहली असम यात्रा है।

श्री मोदी ने सीएए के मुद्दे पर कहा, “ मैं असम के लोगों को भरोसा दिलाना चाहता हूं कि सीएए से कोई बाहरी व्यक्ति देश में नहीं आएगा, इस कानून को लेकर बहुत सी भ्रांतियां कई ऐसे लोगों द्वारा फैलायी जा रही हैं। ”

श्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार असम समझौते का खंड 6 बहुत जल्द ही लागू करेगी। उन्होंने कहा,“ जैसे ही हमें कमीशन की रिपोर्ट मिलेगी, हम असम समझौते का खंड 6 लागू कर देंगे। हम इसमें कोई देर नहीं करेंगे।”

प्रधानमंत्री ने कोकराझार के लोगों द्वारा मोटर साइकिल रैली निकाले जाने और मिट्टी के दीये जलाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक दिन कई शहीदों के बलिदान के बाद आया है।

श्री मोदी ने कहा, “आज असम ही नहीं पूरे पूर्वोत्तर के लिए एक नया दिन है। आज का दिन यह संकल्प करने का है कि विकास और विश्वास को अपनाया जाए और हिंसा को दूर किया जाए। ”

इस मौके पर उन्होंने पिछली गैर-भाजपा सरकारों पर हमला करते हुए कहा कि इससे पहले किसी ने पूर्वोत्तर के लोगों की समस्या का समाधान नहीं किया और अशांति को जारी रहने दिया।

उन्होंने कहा, “इस रुख ने क्षेत्र के लोगों को केंद्र से अलग-थलग रखा और उनका भारतीय लोकतंत्र एवं संविधान में विश्वास खत्म हो गया।

उन्होंने कहा, “बोडो समझौते से नई उम्मीदों, नए सपनों, नए हौसले का संचार हुआ है… लोगों के सहयोग के कारण ही स्थाई शांति का मार्ग प्रशस्त हुआ है।”

उन्होंने कहा, “कश्मीर, पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों, और नक्सली इलाकों में जो लोग अभी भी बम, बंदूक और बुलेट थामे हुए हैं… वापस आइए… मुख्य धारा में शामिल होइए। वापस लौट आइए और जीवन का जश्न मनाइए।”

उन्होंने कहा कि अब पूर्वोत्तर की शांति एवं विकास के लिए एक साथ मिलकर काम करने का वक्त है। गौरतलब है कि इस समझौते से अशांत राज्य में सदा के लिए शांति कायम होने की उम्मीद की जा रही है।

उन्होंने नये नागरिकता कानून के लागू होने को लेकर क्षेत्र के लोगों की चिंताओं को भी दूर करने का प्रयास किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘झूठी अफवाहें फैलाई जा रही है कि सीएए लागू होने के बाद बाहर के लाखों लोग यहां आ जाएंगे। मैं असम के लोगों को आश्वस्त करता हूं कि ऐसा कुछ भी नहीं होगा।’’

वह नए नागरिकता कानून के लागू होने के बाद पहली बार असम आए थे। इससे पहले सीएए विरोधी प्रदर्शनों को देखते हुए प्रधानमंत्री ने दो बार… पिछले साल दिसंबर में और इस साल जनवरी में… गुवाहाटी की यात्रा रद्द की थी।

उन्होंने कहा कि 1993 और 2003 में हुए बोडो समझौते असम के बोडो वर्चस्व वाले इलाकों में स्थायी शांति नहीं ला पाए थे।

मोदी ने कहा, ‘‘नया बोडो समझौता समाज के सभी समुदायों और वर्गों की जीत है। कोई भी हारा नहीं है। इस समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अब कोई मांग नहीं बची है।’’

सरकार ने असम के सबसे खतरनाक उग्रवादी समूहों में से एक नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के सभी धड़ों, ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (एबीएसयू), यूनाइटेड बोडो पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (यूबीपीओ) के साथ 27 जनवरी को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत उन्हें राजनीतिक एवं आर्थिक लाभ देने की बात कही गई थी, लेकिन अलग राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बनाने की नहीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उच्च शक्ति वाली समिति के रिपोर्ट सौंपने के बाद असम समझौते की उपधारा छह को लागू करने के लिए केंद्र तेजी से काम करेगा।

इस उपधारा में असम के लोगों की सांस्कृतिक, सामाजिक, भाषाई पहचान एवं संपदा को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए संवैधानिक, विधायी एवं प्रशासनिक संरक्षण देने का उल्लेख है।

उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर कभी सिर्फ आर्थिक सहायता लेने वाला राज्य माना जाता था, लेकिन अब वह विकास का इंजन है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बनने के बाद 14वें वित्त आयोग के तहत क्षेत्र के आठ राज्यों के लिए केंद्र का कुल आवंटन बढ़कर तीन लाख करोड़ रुपये के आश्चर्यनजक स्तर पर पहुंच गया, जबकि 13वें वित्त आयोग के तहत यह राशि 90,000 करोड़ रुपये था।

मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर में लंबे समय तक सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम (अफस्पा), 1958 लागू रहा लेकिन अब त्रिपुरा और राज्य के कई अन्य हिस्से इससे मुक्त हो गए हैं।

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Dr.Sushil Sharma Admin/Editor

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