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SC/ST एक्ट:पुनर्विचार याचिका में सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने रखे ये तर्क Attack News

नई दिल्ली 2 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट में SC/ST एक्ट में आये फ़ैसले के बाद सोमवार को मोदी सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की. इस पुनर्विचार याचिका में सरकार ने अपनी तरफ़ से तर्क दिए हैं कि जिस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है उसमें सरकार कोई पार्टी नहीं है.

केंद्र सरकार की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि सरकार ने कहा कि SC/ST एक्ट पर जिस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया हैं उसमें सरकार पार्टी नहीं थी, जबकि संसद ने यह कानून बनाया था. केंद्र ने अपनी याचिका में कहा है कि क़ानून बनाना संसद का काम हैं.

सरकार का मानना हैं कि सुप्रीम कोर्ट 3 तथ्यों के आधार पर ही क़ानून को रद्द कर सकती हैं. ये तीन तथ्य है कि अगर मौलिक अधिकार का हनन हों, अगर क़ानून ग़लत बनाया गया हो, अगर कोई क़ानून बनाने का अधिकार संसद के अधिकार क्षेत्र में आता नहीं हो तो. इसके साथ ही सरकार की ये भी दलील हैं कि कोर्ट ये नहीं कह सकता हैं कि क़ानून का स्वरूप कैसा हों क्योंकि क़ानून बनाने का अधिकार संसद के पास हैं.

इसके साथ ही केंद्र ने यह भी दलील दी कि किसी भी क़ानून को सख़्त बनाने का अधिकार भी संसद के पास ही हैं.

केंद्र सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि समसामयिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कैसा क़ानून बने ये संसद या विधानसभा तय करती हैं.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आज बताया कि केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति( अत्याचार निवारण) अधिनियम को‘ कमजोर’ करने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर दी है. साथ ही उन्होंने राजनीतिक पार्टियों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में किसी तरह की सांप्रदायिक हिंसा को अंजाम न दिया जाए.

राजनाथ ने उन आरोपों को भी‘‘ निराधार’’ बताया जिनमें राजग सरकार के पिछड़े समुदायों के उत्थान के खिलाफ होने की बात कही गई थी.

सिंह ने पत्रकारों से कहा, ‘‘ यह सुनिश्चित करना राजनीतिक पार्टियों की नैतिक जिम्मेदारी है कि कहीं भी कोई जातीय या सांप्रदायिक हिंसा न हो.’’

उच्चतम न्यायालय ने20 मार्च को अपने आदेश में कहा था कि अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति( अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमों में बिना जांच के किसी भी लोक सेवक को गिरफ्तार न किया जाए और सामान्य नागरिकों को भी कानून के तहत पूछताछ के बाद ही गिरफ्तार किया जाए.

न्यायालय के आदेश का विरोध करते हुए कई दलित संगठनों ने आज भारत बंद आहूत किया .संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दलितों की दुर्दशा को लेकर आरएसएस और भाजपा पर हमला बोला और कहा कि वह समुदाय के उन ‘‘भाईयों और बहनों’’ को सलाम करते हैं जो मोदी सरकार से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरे हैं.

संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा, ‘‘केंद्र सुनवाई में पक्षकार नहीं है. इसलिए सामाजिक न्याय मंत्रालय की ओर से एक व्यापक पुनर्विचार याचिका दायर कर दी गई है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत सरकार पूरे सम्मान के साथ यह कहना चाहती है कि वह उच्चतम न्यायालय द्वारा मामले में दिए तथ्यों से सहमत नहीं है.’’attacknews.in

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