इस्लामाबाद/कोलंबो , छह अगस्त । जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद मंगलवार को भारत के खिलाफ एक प्रस्ताव की भाषा को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच मतभेद के बाद पाकिस्तान संसद की संयुक्त बैठक स्थगित कर दी गयी।
कार्यवाही शुरू होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री आजम खान स्वाति ने प्रस्ताव पेश कर भारत द्वारा नियंत्रण रेखा (एलओसी) के ‘‘उल्लंघन’’ की आलोचना की, लेकिन भारतीय संविधान से अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने का उल्लेख नहीं किया।
विपक्षी सांसदों ने इस चूक पर विरोध किया और कार्यवाही का बहिष्कार करने की धमकी दी, जिसके बाद नेशनल असेंबली के स्पीकर असद कैसर ने संशोधित प्रस्ताव के बाद तुरंत बैठक बुलाने के वादे के साथ कार्यवाही स्थगित कर दी।
हालांकि, संयुक्त बैठक में कार्यवाही नहीं हो पायी क्योंकि दोनों पक्ष प्रस्ताव की भाषा पर सहमत नहीं हो गए ।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएम) के नेता अहसान इकबाल ने मीडिया को बताया कि अनुच्छेद 370 के बारे में सरकार ने प्रस्ताव में जिक्र नहीं किया जिसके कारण विपक्ष को मजबूरन विरोध करना पड़ा ।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने इतना बड़ा कदम उठाया और प्रस्ताव में उसका जिक्र ही नहीं है। इसी कारण से इसका विरोध करना पड़ा।’’
उधर कोलंबो में श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा है कि लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाना भारत का आंतरिक मामला है ।
भारत सरकार ने सोमवार को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेश- जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांटने का प्रस्ताव संसद में पेश किया।
चिर प्रतीक्षित मांग पूरा होने पर बौद्ध बहुल लेह शहर के लोगों ने खुशियां मनायी ।
विक्रमसिंघे ने सोशल मीडिया साइट पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘लद्दाख और राज्य का पुनर्गठन भारत का आंतरिक मामला है । ’’
श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने कहा कि लद्दाख आखिरकार भारतीय राज्य (केंद्रशासित क्षेत्र) बन जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं मानता हूं कि आखिरकार लद्दाख भारतीय राज्य (केंद्रशासित क्षेत्र) बन जाएगा। लद्दाख में 70 प्रतिशत बौद्ध आबादी है और बौद्ध बहुल यह पहला भारतीय राज्य होगा।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह लद्दाख गए हैं और ‘‘यह वास्तव में शानदार यात्रा थी। ’’
श्रीलंका बौद्ध बहुल देश है । यहां 74 प्रतिशत नागरिक बौद्ध धर्म के हैं ।