मुंबई, 15 अगस्त । अपने समय की मशहूर अभिनेत्री विद्या सिन्हा का लंबी बीमारी के बाद बृहस्पतिवार को निधन हो गया। वह 71 वर्ष की थीं।
अभिनेत्री को कथित सांस संबंधी समस्याओं के चलते हाल ही में यहां उपनगरीय अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
सिन्हा की पुत्री जान्हवी ने बताया, “लंबी बीमारी के बाद आज दोपहर 12 बजे अस्पताल में उनका निधन हो गया।”
रंजनीगंधा’ और ‘पति पत्नी और वो’ जैसी फिल्मों में अपने नायाब अभिनय से लाखों फिल्म प्रेमियों के दिल में जगह बनाने वाली बुजुर्ग अभिनेत्री विद्या सिन्हा नहीं रहीं।
फेफड़े और दिल की बीमारी से पीड़ित 71 वर्षीय अभिनेत्री ने गुरुवार को जुहू के क्रिटीकेयर अस्पताल में करीब 12 बजे अंतिम सांस ली। सांस लेने में दिक्कत होने पर अभिनेत्री को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वह वेंटिलेटर पर थीं।
अभिनेत्री ने फिल्मी पर्दे के साथ-साथ छोटे पर्दे पर बहू रानी, हम दो हैं ना’ और ‘भाभी’ जैसे सीरियलों में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
मुंबई में 15 नवंबर 1947 को जन्मी विद्या सिन्हा की फिल्म ‘छोटी सी बात’ और ‘स्वयंवर’ को भी लोगों ने खूब पंसद किया था। वर्ष 1974 में बासु चटर्जी की फिल्म ‘रजनीगंधा’ से विद्या सिन्हा रुपहले पर्दे पर लोकप्रियता की सीढ़ी पर चढ़ी। इसके बाद 1975 में ‘छोटी सी बात’ से वह बालीवुड की नयी सुपरस्टार बनीं। वर्ष 1977 में उनकी छह फिल्में आईं लेकिन इन्हें खास सफलता नहीं मिली। इसके बाद 1978 में आई पांच फिल्मों में से ‘पति पत्नी और वो’ ने खूब धमाल मचाया। उन्होंने 1981 में अचानक फिल्म जगत से वैराग्य ले लिया लेकिन पांच साल बाद फिर वापसी कर 1986 में दो फिल्में की किंतु ये फ्लाप रहीं।
वह अंतिम बार ‘कुल्फी कुमार बाजेवाल’ सीरियल में नजर आई थीं। उनके दादी के किरदार ने छोटे पर्दे के दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ी थी।
फिल्मी जिंदगी की तरह ही विद्या सिन्हा का जीवन भी काफी उतार चढ़ाव वाला रहा। फिल्म जगत में आने से पहले ही उनका 1968 में वेंकटेश्वरन अय्यर से विवाह हुआ था। वर्ष 1996 में उनके पति का निधन हो गया। इसके बाद 2001 में अभिनेत्री ने भीमराव सलूंखे से विवाह रचाया। यह रिश्ता ज्यादा नहीं चल पाया और 2009 में टूट गया।
विद्या को “रजनीगंधा”, “छोटी सी बात” में अमोल पालेकर के साथ अभिनय और “पति-पत्नी और वो” समेत कई फिल्मों में उनके बेहतरीन अभिनय के लिये याद किया जाता है।
इसके अलावा उन्होंने कुछ टीवी धारावाहिकों में भी अभिनय किया, जिनमें “काव्यांजलि”, “कबूल है” और “कुल्फी कुमार बाजेवाला” शामिल हैं