बरेली 17 जुलाई । उत्तर प्रदेश में बरेली के महापौर उमेश गौतम ने आरोप लगाया है कि नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही के चलते कान्हा पशु आश्रय स्थल पर पिछले तीन माह के दौरान 125 गौवंश की मृत्यु हो चुकी है।
निगम के एक अभियंता की कथित रूप से पिटाई करने के आराेप में श्री गौतम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है। इसके बाद महापौर ने नगर निगम के अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
महापौर का कहना है कि अफसरों की लापरवाही के कारण कान्हा पशु आश्रय स्थल में तीन माह में करीब 125 गौवंशों की मौत हो चुकी है। वहां पर गायों की दुर्दशा देखकर दिल काँप उठता है। मेयर ने सबूत के लिए सूची भी मीडिया को दिखाई है ।
महापौर ने उन सभी मृत गायों के मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाकर इस बात का सबूत दे दिया कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में गायों की मौत कैसे हो गई। ये सभी प्रमाण पत्र नगर स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा बनाये गए है।
मेयर का कहना है कि मृत गायों का पोस्टमार्टम कराए बगैर बाकरगंज डलावघर में दफनाया जा रहा है जिससे गायों की मौत का कारण भी पता नहीं चल पा रहा है।
मेयर का कहना है कि नगर निगम में इन दिनों भ्रष्टाचार चरम पर है। यहां गायो को पकड़कर लाया जाता है और छोड़ने के नाम पर जुर्माने के अलावा मोटी रकम भी वसूली जाती है। जब इस बात का हमने विरोध किया तो हमारे और हमारे साथियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी ।
बरेली महापौर के खिलाफ एफआईआर
इससे पहले का घटनाक्रम यह है जहां से विवाद शुरू हुआ, कल उत्तर प्रदेश के बरेली में महापौर डा उमेश गौतम और नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन के बीच पिछले करीब दो महीने से चल रहा शीत युद्ध चरम आ गया है।
डा उमेश गौतम और 25 पार्षदों समेत 50 लोगों के खिलाफ कोतवाली में सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में एफ आई आर दर्ज कराई गयी है। साथ ही महापौर के खिलाफ मोर्चाबंदी करते हुए निगम कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहे।
अधिकृत सूत्रों ने बताया कि वार्ड 65 सुरेश शर्मा नगर क्षेत्र से नगर निगम की टीम ने चार दिन पहले दो लोगों की एक-एक गाय पकड़ ली थी। पार्षद नरेश पटेल ने महापौर डा गौतम से गाय छुड़वाने की मांग की तो उन्होंने प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी (मूल पद पर्यावरण अभियंता) संजीव प्रधान को 1500 रुपये शुल्क लेकर गाय छोड़ने के निर्देश दिए। बावजूद इसके गाय नहीं छोड़ी गई।
सोमवार को दोपहर महापौर पार्षदों के साथ नगर स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय में पहुंच गए। कंप्यूटर ऑपरेटर को शुल्क की रसीद नहीं काटने पर हड़काया। प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी के नहीं मिलने पर सीधे नगर आयुक्त कक्ष में पहुंचे। वहां बैठे प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी पर जमकर बरसे। फिर हाथ पकड़कर उनके कार्यालय में खींच लाए। कार्यालय में उनसे तत्काल शमन शुल्क काटने को कहा। हंगामे की सूचना पर सीओ प्रथम के साथ बड़ी संख्या में पुलिस पहुंच गई।
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